Travel story
शीतला देवी मंदिर: हल्द्वानी के पास एक पहाड़ी पड़ाव

admin · 2020-12-15
हल्द्वानी से लगभग नौ किलोमीटर की दिशा में, काठगोदाम और रानीबाग के पास पहाड़ी पर शीतला देवी मंदिर है। शहर की हलचल से निकलकर थोड़ी ही देर में जंगल और चढ़ाई वाला रास्ता मिल जाता है। दर्शन के साथ आसपास का शांत परिवेश इस यात्रा की पहचान है।
मंदिर का पैदल रास्ता
मुख्य सड़क से मंदिर की ओर अलग रास्ता जाता है। अंतिम हिस्से में करीब आधा किलोमीटर पैदल चलना पड़ता है। शुरुआत में चढ़ाई है, फिर रास्ता कुछ सहज होता है। दीवार और रेलिंग वाले हिस्सों से ध्यान से चलते हुए ऊपर पहुँचा जा सकता है। समय अपनी गति के अनुसार रखें।
रास्ते में बंदर दिखाई दे सकते हैं। उनसे दूरी रखें, भोजन न दिखाएँ और उन्हें खिलाने की कोशिश न करें। वन क्षेत्र के संकेतक और प्रवेश संबंधी निर्देशों का पालन करें।
परिसर और आस्था
मुख्य मंदिर में शीतला देवी की काले पत्थर की प्रतिमा है। आसपास काली, दुर्गा, गणेश और हनुमान से जुड़े स्थान भी हैं। नवरात्र और अन्य धार्मिक अवसरों पर पूजा तथा भंडारे की हलचल बढ़ जाती है। बीमारी से रक्षा संबंधी लोकमान्यताएँ देवी की पूजा से जुड़ी हैं; स्वास्थ्य संबंधी समस्या में चिकित्सा की आवश्यकता अलग बनी रहती है।
पुराने रास्तों की स्मृति
क्षेत्र की लोकस्मृति में यह स्थान पुराने हाट, व्यापारियों और पैदल यात्रा के रास्तों से जुड़ता है। पास के किले तथा गोरखा काल की कथाएँ भी सुनने को मिलती हैं। ऐसी बातें स्थानीय इतिहास को जानने की उत्सुकता जगाती हैं, हालांकि सभी विवरणों की एक जैसी ऐतिहासिक पुष्टि नहीं है।
छोटी यात्रा की योजना
हल्द्वानी या काठगोदाम में ठहरकर यहाँ आया जा सकता है। पानी साथ रखें और बारिश में फिसलन का ध्यान रखें। मंदिर के आसपास का समय केवल दर्शन तक सीमित न रखें; कुछ देर शांत बैठकर नीचे के शहर और पहाड़ी वातावरण का अंतर महसूस करना भी अच्छा लगता है।
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