Travel story
कटारमल सूर्य मंदिर: अल्मोड़ा के पास पत्थरों में सहेजा इतिहास

admin · 2022-11-18
अल्मोड़ा–रानीखेत मार्ग के पास पहाड़ी पर स्थित कटारमल सूर्य मंदिर कुमाऊँ की महत्वपूर्ण स्थापत्य धरोहर है। गाँव, सीढ़ीदार खेत और पत्थर के मंदिर मिलकर यहाँ का अनुभव बनाते हैं।
मंदिर तक का रास्ता
कोसी से रानीखेत की दिशा में आगे बढ़ने पर कटारमल के लिए अलग मार्ग मिलता है। पुरानी यात्रा में मुख्य सड़क से मंदिर की ओर लगभग तीन किलोमीटर का रास्ता बताया गया है। रास्ते से कोसी, हवालबाग और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र दिखाई देते हैं। पारंपरिक पहाड़ी घरों को देखते हुए मंदिर के पास पहुँचते हैं।
इतिहास और लोककथा
मंदिर का संबंध कत्यूरी काल और राजा कटारमल से जोड़ा जाता है। पूर्व की ओर मुख किए मंदिर समूह में पत्थर की बनावट और शिल्प ध्यान खींचते हैं।
एक लोककथा के अनुसार इसका निर्माण एक रात में होना था और सूर्योदय के कारण शिखर का काम अधूरा रह गया। दूसरी व्याख्या समय के साथ हुए नुकसान को कारण मानती है। इन कथाओं और भवन की दिखाई देने वाली अवस्था को अलग-अलग समझना चाहिए।
सूर्य-उपासना की परंपरा प्रकृति के प्रति श्रद्धा का एक रूप है। परिसर में कुछ देर बैठकर अलग-अलग मंदिरों की बनावट देखने पर यात्रा केवल तस्वीर लेने तक सीमित नहीं रहती।
कहाँ ठहरें
कोसी और अल्मोड़ा में ठहरकर यहाँ आया जा सकता है। रानीखेत या कौसानी की यात्रा में भी मार्ग के अनुसार इसे जोड़ा जा सकता है। काठगोदाम तक रेल और उसके बाद सड़क यात्रा एक विकल्प है।
चितई, कसारदेवी और जागेश्वर जैसे स्थानों को उसी छोटे पड़ाव का हिस्सा न मानें; उनके लिए अलग दूरी और समय देखें। नीचे दिए वीडियो में कटारमल की पूरी यात्रा है।
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