कुमाऊँ की पहाड़ियों में कैंची धाम बाबा नीम करौली से जुड़ा आश्रम है। शिप्रा नदी के पास स्थित परिसर में हनुमान भक्ति और सेवा की परंपरा से जुड़े लोग दूर-दूर से आते हैं। यात्रा की अच्छी तैयारी से रास्ते की भागदौड़ कम होती है और दर्शन के लिए पर्याप्त समय मिलता है।
कैसे पहुँचें
रेल से आने वाले यात्री काठगोदाम, हल्द्वानी या अपनी ट्रेन के अनुसार लालकुआँ तक पहुँचकर आगे सड़क यात्रा करते हैं। भीमताल और भवाली होकर कैंची धाम की ओर जाया जाता है। नैनीताल से आने पर भी भवाली प्रमुख पड़ाव है। हवाई यात्रा के लिए पंतनगर की उड़ान और आगे उपलब्ध वाहन की पुष्टि करें।
पहाड़ी मार्ग पर मोड़, बाजार और यातायात यात्रा का समय बढ़ा सकते हैं। विशेष आयोजनों, सप्ताहांत और छुट्टियों पर अतिरिक्त समय रखें। पार्किंग या शटल की व्यवस्था बदल सकती है; उस दिन पुलिस और स्थानीय प्रशासन के निर्देशों के अनुसार चलें।
कहाँ ठहरें
कैंची के आसपास और भवाली में होटल तथा गेस्ट हाउस मिलते हैं। रामगढ़ या मुक्तेश्वर का शांत वातावरण पसंद हो सकता है, लेकिन वहाँ से मंदिर तक अलग सड़क यात्रा करनी होगी। बुकिंग करते समय केवल जगह का नाम नहीं, नक्शे पर वास्तविक दूरी भी देखें।
आश्रम में ठहरने को होटल जैसी सामान्य उपलब्ध सुविधा न मानें। यदि ऐसी इच्छा हो तो आधिकारिक ट्रस्ट से सीधे नियम और अनुमति की जानकारी लें। किसी अनजान व्यक्ति को आश्रम की बुकिंग या दान के नाम पर पैसे भेजने से पहले उसकी पहचान और आधिकारिक संबंध जाँचें।
परिसर में क्या ध्यान रखें
शालीन कपड़े पहनें, आवाज धीमी रखें और कतार में सहयोग करें। फोटो या वीडियो की अनुमति के लिए परिसर के नियम देखें। आश्रम को अपने आप योग-प्रशिक्षण केंद्र या स्वास्थ्य उपचार स्थल मानकर योजना न बनाएँ; उपलब्ध कार्यक्रमों की जानकारी सीधे संस्था से लें।
भोजन और प्रसाद की व्यवस्था दिन और कार्यक्रम के अनुसार हो सकती है। पास के बाजारों में सामान्य भोजन मिलता है। कुमाऊँ के स्वाद जानना चाहें तो स्थानीय भोजनालयों में आलू के गुटके, भट्ट की चुड़कानी या सिंगौड़ी जैसे विकल्प पूछ सकते हैं।
यात्रा को सहज रखें
कम सामान, पीने का पानी और चलने में आरामदायक जूते उपयोगी रहते हैं। मंदिर दर्शन के साथ एक ही दिन में बहुत दूर के कई स्थान न जोड़ें। पहाड़ का सफर और आश्रम में बिताया समय, दोनों आराम से अनुभव करने के लिए लौटने की योजना में गुंजाइश रखें।
