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झाकर सैम मंदिर: देवदारों के बीच एक शांत पड़ाव

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admin · 2020-06-27
अल्मोड़ा–पिथौरागढ़ मार्ग से थोड़ा हटकर झाकर सैम मंदिर है। बड़े पर्यटन स्थलों की भीड़ से अलग, जंगल के बीच स्थित यह परिसर कुछ देर शांत बैठने का अवसर देता है।
रास्ता और परिसर
अल्मोड़ा से चितई, बाड़ेछीना और आरतोला की दिशा में आकर यहाँ पहुँचा जा सकता है। पुराने विवरण में अल्मोड़ा से दूरी लगभग 35–40 किलोमीटर और मुख्य मार्ग से मंदिर की सड़क करीब डेढ़ किलोमीटर बताई गई है। पिथौरागढ़ की ओर से आने पर दन्या वाला मार्ग पड़ता है।
मंदिर तक सड़क जाती है। हमारी यात्रा में सामने वाहन खड़े करने की जगह और पूजा की सामग्री की कुछ दुकानें थीं। प्रवेश द्वार से सीढ़ियाँ चढ़कर खुले परिसर में पहुँचे। आसपास देवदार और अन्य पहाड़ी वृक्ष हैं।
सेम देवता की मान्यता
मुख्य मंदिर सेम देवता को समर्पित है। स्थानीय कथा इसे जागेश्वर मंदिर के निर्माण से जोड़ती है। कथा के अनुसार निर्माण में बाधा डालने वाली शक्तियों का ध्यान इस स्थान की ओर किया गया, जिससे जागेश्वर का काम पूरा हो सका।
कुमाऊँ के अनेक गाँवों में सेम देवता की पूजा ग्राम-रक्षा और फसल की कुशलता के लिए की जाती है। नया अनाज, रोट और भेंट चढ़ाने की परंपरा भी मिलती है। झाकर सैम में चैत्र और नवरात्र के समय विशेष पूजा तथा अधिक श्रद्धालु देखे जाते हैं।
ठहरना और भोजन
पुराने लेख में मंदिर की धर्मशाला का उल्लेख है; रुकना हो तो उपलब्धता पहले पूछें। जागेश्वर, दन्या, धौलछीना, कसारदेवी या अल्मोड़ा में ठहरकर भी दिन में दर्शन के लिए आ सकते हैं।
मंदिर के पास भोजन के विकल्प सीमित हो सकते हैं। पानी और आवश्यक सामान साथ रखें। नीचे दिए वीडियो में रास्ता, परिसर और स्थानीय मान्यताओं का परिचय देखें।
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