Travel story
अल्मोड़ा से पिथौरागढ़: चितई और जागेश्वर होकर सड़क यात्रा

admin · 2023-07-11
POPCORNTRIP FILMS
See the journey unfold.
Follow the journey from Almora towards Pithoragarh, with Chitai and a detour to Jageshwar.
अल्मोड़ा से पिथौरागढ़ के सफर में केवल दो नगर नहीं जुड़ते। रास्ते में मंदिर, छोटे बाजार, जंगल और नदी-घाटियाँ मिलती हैं। इस बार हम आदि कैलाश यात्रा के दौरान केएमवीएन के समूह के साथ इस मार्ग से गुजरे।
धारानौला से शुरुआत
अल्मोड़ा के धारानौला क्षेत्र से पिथौरागढ़ की बस और टैक्सी की जानकारी मिलती है। भोजनालय और ठहरने के विकल्प भी हैं। समय हो तो ऊपर पटाल बाजार तक पैदल जा सकते हैं। बाल मिठाई, चॉकलेट और सिंगौड़ी जैसी स्थानीय मिठाइयाँ खरीदते समय रखने तथा उपयोग की अवधि दुकान से पूछ लें।
हमारे पुराने विवरण में अल्मोड़ा–पिथौरागढ़ दूरी लगभग 114 किलोमीटर है। बीच के दर्शन और भोजन का समय इससे अलग जोड़ना होगा।
सिकुड़ा बैंड, फलसीमा और चितई
धारानौला से आगे सिकुड़ा बैंड पर एक रास्ता जलना–लमगड़ा की दिशा में अलग होता है। पिथौरागढ़ की ओर बढ़ते हुए फलसीमा से अल्मोड़ा और घाटियों का दृश्य मिलता है। आगे उदय शंकर नाट्य अकादमी का भवन तथा एनटीडी क्षेत्र आता है।
अल्मोड़ा से लगभग आठ–नौ किलोमीटर पर चितई है। गोलू देवता के मंदिर में घंटियाँ और श्रद्धालुओं के पत्र दिखाई देते हैं। स्थानीय परंपरा में उन्हें न्याय का देवता माना जाता है। सड़क किनारे प्रसाद की दुकानें और आगे पार्किंग की व्यवस्था मिली।
पेटशाल, लखु उड्यार और बाड़ेछीना
चितई से नीचे उतरते हुए पेटशाल आया। इसके आगे लखु उड्यार के शैलाश्रय हैं, जहाँ प्राचीन चित्रांकन देखा जा सकता है। इस स्थान पर अलग वीडियो भी PopcornTrip में उपलब्ध है।
बाड़ेछीना आसपास के गाँवों का बाजार है। आगे तिराहे से धौलछीना, सेराघाट, बेरीनाग और चौकोड़ी की दिशा का रास्ता अलग होता है। हम पिथौरागढ़ वाले मार्ग पर बढ़े।
पनुवानौला और जागेश्वर का विराम
बाड़ेछीना से लगभग 11 किलोमीटर आगे पनुवानौला और उसके करीब दो किलोमीटर बाद आरतोला मिला। आरतोला से लगभग तीन किलोमीटर अलग जाकर जागेश्वर धाम पहुँचा जा सकता है।
हमने मंदिर समूह में समय बिताया। पत्थर के छोटे-बड़े मंदिरों की नक्काशी और देवदारों के बीच का वातावरण विशेष लगता है। संग्रहालय में मंदिरों से जुड़ी प्रतिमाएँ और अन्य सामग्री देखी जा सकती है। पास के कुबेर तथा चंडिका देवी मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े हैं।
दर्शन के बाद केएमवीएन के अतिथि गृह में भोजन किया। फिर दंडेश्वर मंदिर वाले रास्ते से वापस आरतोला लौटे और पिथौरागढ़ का सफर जारी रखा।
गरुड़ाबांज से पनार
इस क्षेत्र से झाकर सैम मंदिर का मार्ग भी अलग होता है। आगे गरुड़ाबांज के पास बाँज और चौड़ी पत्ती वाले पेड़ दिखाई दिए। अब तक के चीड़ वाले हिस्सों से जंगल का रूप कुछ अलग था।
ध्याड़ी, बसौलीखान और पनार रास्ते के अन्य पड़ाव हैं। पनार में रामगंगा बहती है। पिथौरागढ़ से पहले गुरना माता का मंदिर आता है, जहाँ इस मार्ग से जाने वाले कई यात्री दर्शन के लिए रुकते हैं।
इसके बाद पिथौरागढ़ की ओर बढ़ते हुए हमारी इस चरण की यात्रा पूरी हुई। नीचे दिए वीडियो में पूरे मार्ग और पड़ावों का अनुभव देखें।
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