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मायावती का अद्वैत आश्रम: स्वामी विवेकानंद की कल्पना से आकार लेता एक स्थान

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admin · 2023-04-07
चंपावत जिले में लोहाघाट के पास मायावती का अद्वैत आश्रम स्वामी विवेकानंद के उस विचार से जुड़ा है, जिसमें हिमालय के बीच अध्ययन, चिंतन और साधना के लिए शांत स्थान की कल्पना थी। इस आश्रम की कहानी समझने के लिए उन्नीसवीं सदी के अंतिम वर्षों की ओर लौटना पड़ता है।
एक शांत आश्रम की कल्पना
मूल वृत्तांत के अनुसार, विदेश प्रवास के दौरान कप्तान सेवियर और श्रीमती सेवियर के साथ स्विट्जरलैंड की यात्रा ने स्वामी विवेकानंद को हिमालय की याद दिलाई। वे पहले उत्तराखंड आ चुके थे और अल्मोड़ा तथा आसपास के क्षेत्र से परिचित थे। उन्होंने अपने अनुयायी लाल बद्री शाह को पत्र लिखकर अल्मोड़ा के निकट आश्रम के लिए उपयुक्त स्थान की इच्छा बताई।
उनकी कल्पना में प्रकृति के बीच छोटी कुटिया, पुस्तकें, बगीचा और ध्यान के लिए एकांत था। मूल लेख में उनके पत्रों के लंबे उद्धरण दिए गए थे; यहाँ उस भाव को सरल शब्दों में रखा गया है।
प्रबुद्ध भारत और मायावती
‘प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका के संपादक राजम अय्यर के निधन के बाद उसके प्रकाशन को जारी रखने का प्रश्न उठा। कप्तान सेवियर ने सहयोग दिया और कुछ समय उसका कार्यालय अल्मोड़ा के थॉमसन हाउस में चला। बाद में अधिक शांत स्थान की खोज कप्तान सेवियर और स्वामी स्वरूपानंद को मायावती तक ले गई।
मूल विवरण में 2 मार्च 1899 को भूमि खरीदने और उसके बाद आश्रम तथा प्रकाशन का कार्य शुरू होने का उल्लेख है। कप्तान सेवियर के निधन के बाद स्वामी विवेकानंद जनवरी 1901 में यहाँ आए और लगभग पखवाड़े भर रहे। उन्होंने इस प्रवास में अध्ययन, लेखन, ध्यान और आसपास भ्रमण किया। कठोर ठंड के कारण उनके निवास-कक्ष में परिवर्तन का प्रसंग भी आश्रम की स्मृतियों में जुड़ा है।
अद्वैत का विचार
आश्रम का मूल भाव अद्वैत है—जीव और ब्रह्म को अलग न मानने वाला चिंतन। यहाँ का साधना-परिवेश मूर्ति-पूजा के बजाय अध्ययन, ध्यान और आत्मचिंतन से जुड़ा बताया गया है। आगंतुक के लिए स्थान की इसी भावना को समझना और उसकी शांति बनाए रखना महत्वपूर्ण है।
सेवा और आश्रम का जीवन
श्रीमती सेवियर से जुड़े धर्मार्थ अस्पताल का उल्लेख मूल लेख का महत्वपूर्ण हिस्सा है। आसपास के ग्रामीणों तक चिकित्सा-सुविधा पहुँचाने की परंपरा, पत्रिका का काम, गौशाला, खेती और वर्षाजल संग्रहण आश्रम के जीवन के अलग-अलग पक्ष हैं।
यहाँ अतिथि-निवास का उल्लेख भी है, लेकिन इसे सामान्य होटल की तरह नहीं समझना चाहिए। मूल विवरण में आध्यात्मिक रुचि रखने वाले साधकों के लिए पूर्व अनुमति और सीमित अवधि का प्रवास बताया गया था। वर्तमान पात्रता, खुले रहने की अवधि और आवेदन की प्रक्रिया आश्रम से ही पता करें।
मायावती की यात्रा केवल किसी ऐतिहासिक भवन को देखने का अवसर नहीं है। यह उस विचार से परिचय भी है, जिसमें हिमालय की नीरवता, अध्ययन और सेवा को एक साथ रखा गया।
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