देहरादून के ऊपर लगभग दो हजार मीटर की ऊँचाई पर बसी मसूरी की पहचान पहाड़ी दृश्यों, पुराने भवनों और व्यस्त माल रोड से है। ‘पहाड़ों की रानी’ कहे जाने वाले इस शहर को देखने का अच्छा तरीका है कुछ रास्ते पैदल चलना और आसपास के स्थलों के लिए अलग समय रखना। हमारी सैर में बाजार की चहल-पहल के साथ शांत पहाड़ियाँ भी शामिल रहीं।
माल रोड के दो सिरे
माल रोड का एक सिरा पिक्चर पैलेस और दूसरा लाइब्रेरी चौक है। करीब दो किलोमीटर की इस सड़क पर दुकानें, भोजनालय, पुरानी इमारतें और घाटी की ओर खुलते दृश्य मिलते हैं। शाम को रोशनी और आवाजाही बढ़ने के साथ इसका रूप बदल जाता है। जहाँ वाहन प्रवेश नियंत्रित हो, वहाँ स्थानीय नियम मानें।
लाइब्रेरी चौक का नाम पुराने पुस्तकालय से जुड़ा है। यहाँ से कंपनी गार्डन और केम्प्टी की दिशा के रास्ते निकलते हैं। पिक्चर पैलेस का नाम भी पुराने सिनेमा की स्मृति सँजोए हुए है। आसपास के बाजारों में ऊनी कपड़े और हस्तशिल्प देखे जा सकते हैं।
गन हिल की चढ़ाई
माल रोड से गन हिल के लिए पैदल रास्ता और रोपवे का विकल्प मिलता है। हमने पैदल चढ़ना चुना। रास्ता छोटा लग सकता है, लेकिन चढ़ाई में साँस और कदम दोनों की गति बदलती है। धीरे-धीरे ऊपर पहुँचने पर नीचे फैला शहर दिखाई देता है। दृश्य मौसम और बादलों पर निर्भर करते हैं।
ऊपर मंदिर, खाने-पीने की दुकानें और मनोरंजन की गतिविधियाँ मिलती हैं। नाम के पीछे तोप से समय बताने की कहानी प्रचलित है; ऐसी स्थानीय कथाओं के अलग-अलग रूप सुनने को मिलते हैं। रोपवे से जाना हो तो संचालन और टिकट की उस दिन की जानकारी लें।
कैमल्स बैक और चर्च
माल रोड से अलग कैमल्स बैक रोड पर घूमना मसूरी का एक और अनुभव है। पहाड़ी दृश्य और रास्ते के मोड़ चलते रहने को प्रेरित करते हैं। पुराने क्राइस्ट चर्च का स्थापत्य भी शहर के औपनिवेशिक इतिहास की झलक देता है। धार्मिक स्थल के खुले रहने और भीतर फोटो बनाने के नियम का सम्मान करें।
कंपनी गार्डन
लाइब्रेरी चौक से कुछ किलोमीटर दूर कंपनी गार्डन में फूलों, हरियाली और परिवार के साथ समय बिताने की जगह मिलती है। बच्चों के मनोरंजन, छोटी झील और खाने-पीने के विकल्प इसे शहर से बाहर का परिचित पड़ाव बनाते हैं। पैदल जाना पसंद हो तो सड़क की चढ़ाई और वाहन यातायात का ध्यान रखें; अन्यथा स्थानीय वाहन से पहुँचा जा सकता है।
दलाई हिल्स और हैप्पी वैली
कंपनी गार्डन की दिशा में हैप्पी वैली का रास्ता तिब्बती समुदाय और बौद्ध परंपरा से परिचय कराता है। शेडुप चोफेलिंग मंदिर के आसपास से दलाई हिल्स की ओर बढ़ते हैं। पहाड़ी पर बुद्ध प्रतिमा और हवा में लहराती प्रार्थना-पताकाएँ वातावरण को अलग रंग देती हैं। हमारी यात्रा के समय यहाँ तेज हवा थी और दूर तक घाटियाँ दिखाई दे रही थीं।
यह शांत बैठने और आसपास देखने की जगह है। प्रार्थना-स्थल में शोर कम रखें और चट्टानों के खुले किनारों पर सावधानी बरतें। आसपास दिखाई देने वाले संस्थागत परिसर सामान्य पर्यटक स्थल नहीं हैं; प्रवेश की अनुमति अलग हो सकती है।
केम्प्टी फॉल
मसूरी से करीब 15 किलोमीटर दूर केम्प्टी फॉल गर्मियों में विशेष रूप से व्यस्त रहता है। सड़क से जलप्रपात तक उतरने की व्यवस्था और उपलब्ध सुविधाएँ मौके पर देखें। पानी के बहाव, गहराई और फिसलन को हल्के में न लें। भीड़ वाले दिन वहाँ पहुँचने और वापस आने में अनुमान से अधिक समय लग सकता है।
लंढौर और लाल टिब्बा
पिक्चर पैलेस से आगे लंढौर की ओर चढ़ाई है। बाजार पार करते हुए ऊपरी हिस्सों में पेड़, पुराने भवन और अपेक्षाकृत शांत रास्ते मिलते हैं। चार दुकान इस सैर का परिचित पड़ाव है। सेंट पॉल चर्च और आसपास की पैदल सड़कों से क्षेत्र के पुराने स्वरूप की झलक मिलती है।
लाल टिब्बा की ओर साफ मौसम में दूर के पहाड़ देखे जा सकते हैं। पैदल घूमने में आनंद है, लेकिन मसूरी और ऊपरी लंढौर की चढ़ाई को ध्यान में रखकर समय तथा अपनी क्षमता के अनुसार चलें। निजी घरों और आवासीय रास्तों की शांति बनाए रखें।
सैर की योजना
बेनोग क्षेत्र, ज्वालाजी मंदिर और मसूरी झील जैसे अतिरिक्त पड़ावों के लिए अलग दिन रखा जा सकता है। वन क्षेत्र में प्रवेश और रास्ते की अनुमति पहले जानें। हर जगह एक ही दिन पहुँचने की कोशिश यात्रा को थकाऊ बना सकती है।
छुट्टियों में मसूरी की सड़कें और पार्किंग भर जाती हैं। होटल का वास्तविक स्थान, पार्किंग और वहाँ तक वाहन पहुँचने की सुविधा पहले पूछें। शहर की क्षमता सीमित है; कचरा न छोड़ना, पानी बचाना और अनावश्यक वाहन यात्रा कम रखना इस खूबसूरत जगह की देखभाल में छोटा लेकिन जरूरी योगदान है।






