देहरादून को समझने के लिए उसके व्यस्त बाजारों के साथ उन रास्तों पर भी चलना चाहिए जहाँ पुराने घर, बगीचे और पेड़ों से घिरे संस्थान दिखाई देते हैं। दून घाटी में बसे इस शहर का विस्तार बहुत हुआ है। पुराने निवासियों की यादों का खुला शहर और आज की घनी बसावट कई जगह एक साथ दिखाई देते हैं।
शहर की पहचान
देहरादून के नाम को गुरु राम राय के डेरे और दून घाटी से जोड़कर देखा जाता है। गुरु राम राय दरबार यहाँ के इतिहास और धार्मिक जीवन का प्रमुख स्थल है। द्रोणाचार्य से जुड़ी स्थानीय कथाएँ भी शहर की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हैं। वन अनुसंधान संस्थान, भारतीय सैन्य अकादमी और सर्वेक्षण जैसे संस्थानों ने देहरादून को शिक्षा और प्रशिक्षण के केंद्र के रूप में पहचान दी है।
घंटाघर और पलटन बाजार
घंटाघर के आसपास शहर की रोजमर्रा की हलचल महसूस होती है। पलटन बाजार में कपड़े, जूते, खाने-पीने की चीजें और छोटी-बड़ी दुकानें हैं। पास का इंदिरा बाजार भी खरीदारी का परिचित इलाका है। इस हिस्से में पैदल घूमना सुविधाजनक रहता है; वाहन के लिए निर्धारित पार्किंग देखें। गांधी पार्क बाजार की भागदौड़ के बीच कुछ देर बैठने की जगह देता है।
सहस्रधारा और गुच्चूपानी
सहस्रधारा की पहचान पानी की धाराओं, आसपास की पहाड़ियों और पिकनिक के वातावरण से है। छुट्टियों में यहाँ भीड़ हो सकती है। पानी में उतरने से पहले गहराई और स्थानीय निर्देश देखें। प्राकृतिक पानी से रोग ठीक होने की बात को उपचार का विकल्प न मानें।
गुच्चूपानी, जिसे रॉबर्स केव भी कहते हैं, चट्टानों के बीच बहते पानी के लिए जाना जाता है। संकरे रास्ते से गुजरने का अनुभव अलग है, पर बारिश में पानी और फिसलन बढ़ सकते हैं। मौसम खराब होने पर भीतर जाने की जिद न करें।
टपकेश्वर, वन अनुसंधान संस्थान और चिड़ियाघर
टपकेश्वर महादेव की गुफा में शिवलिंग पर टपकता जल मंदिर की पहचान है। इसके साथ द्रोणाचार्य की कथा जुड़ी है। परिसर में सीढ़ियों और गीली जमीन पर ध्यान से चलें।
वन अनुसंधान संस्थान का विशाल भवन, लंबे गलियारे और खुला परिसर स्थापत्य में रुचि रखने वालों को आकर्षित करते हैं। संग्रहालय और परिसर की यात्रा के लिए प्रवेश की लागू व्यवस्था देखें। मसूरी रोड पर देहरादून चिड़ियाघर, जिसे पुराने नाम मालसी से भी लोग जानते हैं, परिवार के साथ घूमने का एक अन्य विकल्प है।
आने-जाने की योजना
देहरादून रेल और सड़क से जुड़ा है; हवाई यात्रियों के लिए जौलीग्रांट हवाई अड्डा पड़ता है। शहर और हवाई अड्डे के बीच सड़क यात्रा का समय भी जोड़ें। मुख्य बाजार, संस्थान और आसपास के प्राकृतिक स्थलों को दो-तीन दिनों में बाँटने से सैर आराम से हो सकती है। एक ही दिन में सहस्रधारा, गुच्चूपानी और मसूरी जोड़ देने से अधिकांश समय सड़क पर निकल सकता है।






