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बिनसर वन्यजीव अभयारण्य: जंगल को धीरे-धीरे जानने की यात्रा

Binsar Wildlife Sanctuary, A Haven for Nature Lovers
PopcornTrip

admin · 2024-04-30

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इस सफ़र को चलते हुए देखें।

जंगल के रास्ते, चिड़ियों की आवाज़ें और पेड़ों के बीच एक मंदिर। यहाँ थोड़ा समय लेकर आएँ।

यह दुनिया मनुष्यों जितनी ही पक्षियों, वन्यजीवों और पेड़-पौधों की भी है। बिनसर की यात्रा इस बात को करीब से महसूस करने का अवसर देती है। अल्मोड़ा के पास स्थित इस अभयारण्य में बड़े दर्शनीय स्थलों की सूची से अधिक महत्व जंगल के बीच धीरे चलने, सुनने और देखने का है।

प्रवेश और जंगल का रास्ता

अल्मोड़ा–ताकुला–बागेश्वर मार्ग पर अयारपानी से अभयारण्य का प्रवेश-पथ अलग होता है। वन विभाग के बैरियर पर लागू अनुमति, समय और शुल्क की जानकारी लें। पुराने वीडियो में दिखा शुल्क आज का मानकर न चलें। काठगोदाम से अल्मोड़ा और फिर बिनसर तक सड़क यात्रा की योजना बनाई जा सकती है।

प्रवेश के शुरुआती हिस्से में चीड़ दिखाई देते हैं। आगे बढ़ने पर चौड़ी पत्ती वाले वृक्षों का घना वन मिलता है। सड़क कहीं संकरी, मोड़दार और ऊबड़-खाबड़ है। बरसात में मिट्टी, गड्ढे और फिसलन सफर को प्रभावित कर सकते हैं।

बिनेश्वर महादेव और जीरो पॉइंट

वन के भीतर बिनेश्वर महादेव मंदिर स्थानीय आस्था का महत्वपूर्ण स्थल है। खुले घास के मैदान के पास स्थित मंदिर के आसपास कुछ समय शांत बैठना अच्छा लगता है। इसके बाद झंडीधार, जिसे जीरो पॉइंट कहा जाता है, की ओर यात्रा की जा सकती है। साफ मौसम में वहाँ से हिमालय की विस्तृत श्रृंखलाएँ दिख सकती हैं; दृश्य मिलना मौसम पर निर्भर है।

मंदिर या अन्य रास्तों से पैदल जाने का विचार हो तो स्थानीय पंजीकृत गाइड से मार्ग समझें। हमारी यात्रा में वन विभाग से जुड़े प्रकृति-गाइड भोज जी से मुलाकात हुई थी। अपरिचित पगडंडियों पर अकेले निकलना उचित नहीं है।

पक्षी, पेड़ और पगडंडियाँ

बिनसर में अलग-अलग दूरी के पैदल मार्ग और पक्षी-दर्शन के रास्ते हैं। बिना शोर किए चलने पर जंगल के छोटे अनुभव अधिक स्पष्ट होते हैं—पत्तों की आवाज, पक्षियों की पुकार और रोशनी का बदलता रंग। यहाँ बाँज, बुरांश, चीड़ और अन्य वनस्पतियों के साथ अनेक पक्षी तथा वन्यजीव पाए जाते हैं। किसी जीव को देखने की गारंटी नहीं होती।

वन्यजीवों को खाना न दें, उनका पीछा न करें और निर्धारित मार्ग पर रहें। अनजान पौधों को छूने या तोड़ने से बचें। गाँवों की ओर जाने वाले रास्तों पर स्थानीय अनुमति और मार्गदर्शन लें।

ठहरना और मौसम

बिनसर की यात्रा में अभयारण्य के भीतर ठहराव और आसपास के कसार देवी या पपरसैली क्षेत्र से दिन की सैर—दोनों तरह की योजना बन सकती है। बुकिंग से पहले उपलब्धता, प्रवेश की शर्तें और अंतिम पहुँच स्पष्ट करें।

वसंत में बुरांश के फूल, गर्मियों में अलग तरह की हरियाली और वर्षा में घना वन दिखाई देता है। बरसात में पगडंडियाँ फिसल सकती हैं। सर्द मौसम में दृश्यता कभी बेहतर होती है, लेकिन ठंड और बर्फ रास्ते को प्रभावित कर सकती है।

आरामदायक जूते, जरूरत के अनुसार गर्म और वर्षा से बचाव वाले कपड़े साथ रखें। अपना कचरा वापस लाएँ। बिनसर का अनुभव तभी अच्छा रहता है जब हम जंगल की गति और उसकी सीमाओं का सम्मान करें।

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